केवीके कवर्धा ने आयोजित की बायोफोर्टिफाइड गेहूं उत्पादन पर कृषक संगोष्ठी, आदान सामग्री किया वितरित
किसानों को उन्नत बीज व पीएसबी कल्चर का हुआ वितरण

कवर्धा, कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) कवर्धा द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के अंतर्गत बायोफोर्टिफाइड गेहूं किस्म एचआई-1636 (पूसा वकुला) की उन्नत कास्त तकनीक पर आधारित कृषक संगोष्ठी सह आदान सामग्री वितरण कार्यक्रम का आयोजन 03 दिसंबर 2025 को किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न ग्रामों से आए लगभग 75 कृषकों ने भाग लिया। संगोष्ठी का उद्देश्य किसानों को उन्नत, पोषणयुक्त एवं अधिक उपज देने वाली गेहूं किस्म के वैज्ञानिक उत्पादन की जानकारी देना था।
परियोजना के अंतर्गत कबीरधाम जिले में लगभग 30 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं फसल का प्रदर्शन लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह प्रदर्शन विकासखण्ड लोहारा के ग्राम बुधवारा एवं सलिहा तथा विकासखण्ड पण्डरिया के ग्राम खैरवारकला में किया जा रहा है। योजना के दिशा-निर्देशानुसार किसानों को गेहूं किस्म एचआई-1636 के उन्नत आधार बीज (10 वर्ष के अंदर की अवधि का) तथा बीजोपचार हेतु पीएसबी कल्चर का वितरण किया गया। प्रदर्शन से पूर्व संगोष्ठी के माध्यम से किसानों को गेहूं की वैज्ञानिक खेती की संपूर्ण जानकारी दी गई।
केवीके कवर्धा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.पी. त्रिपाठी ने किसानों को गेहूं उत्पादन की उन्नत तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने 2-3 वर्ष के अंतराल में मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई, बीज उपचार के बाद ही बुवाई का सुझाव देते हुए तथा सीड ड्रिल से बुवाई करने के लिए प्रेरित किया गया । साथ ही मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग एवं बुवाई के 20 दिन के आस पास खरपतवार नियंत्रण हेतु निंदानाशक छिड़काव का सुझाव दिया गया।
उन्होंने बताया कि एचआई-1636 गेहूं किस्म मध्य भारत के लिए उपयुक्त, कम अवधि (लगभग 115 दिन) में पकने वाली, 55-65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देने वाली तथा गर्मी सहनशील किस्म है। इसमें जिंक, आयरन, कॉपर और प्रोटीन की उच्च मात्रा पाई जाती है, जिससे यह स्वादिष्ट और पौष्टिक रोटी बनाने के लिए अत्यंत उपयुक्त है।



